5 जब मेम्ना न तीसरी मुहर खोली, त मय न तीसरो प्रानी ख यो कहतो सुन्यो, "आवो!" मय न नजर करी, अऊर देखो एक कारो घोड़ा हय, अऊर ओको सवार को हाथ म एक तराजू हय; 6 अऊर मय न उन चारयी प्रानियों को बीच म सी एक आवाज कहतो सुन्यो, "एक दिन की मजूरी को बदला एक दिन को खान को गहूं को चुन अऊर एक दिन की मजूरी को लायी तीन दिन तक खान को जौ, पर जैतून को झाड़ अऊर अंगूररस की बाड़ियों ख हानि मत पहुंचावों!"
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