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प्रेरितों 8

32 धरअधपढरहो,

: "ेंीं जसवध पहुंगयो,

अऊर जसअपनऊन कतरन आगपचरहहय,

वसओन अपनुंनहीं ो।

33 ओकनतओकनहीं ो।

ओकसमय ों वरनन करें?

कहि धरतओकवन उठिवय हय"

34 पर ििो, "मय थनकरहय, बति भवियवककहहय, अपनां सरों ?" 35 तब ििअपनुंअऊर कर ओख समो।

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