18 कोयी भी आदमी द्वारा अपनी निन्दा करी जान की अनुमति नहीं दे जो विशेष दर्शन को वजह श्रेष्ठ होन को दावा करय हय अऊर जो झूठी विनम्रता अऊर स्वर्गदूतों की पूजा पर जोर देवय हय। कोयी भी वजह सी, असो लोग अपनी मानविय सोच सी सब ख प्रभावित करय हंय,
18 कोयी भी आदमी द्वारा अपनी निन्दा करी जान की अनुमति नहीं दे जो विशेष दर्शन को वजह श्रेष्ठ होन को दावा करय हय अऊर जो झूठी विनम्रता अऊर स्वर्गदूतों की पूजा पर जोर देवय हय। कोयी भी वजह सी, असो लोग अपनी मानविय सोच सी सब ख प्रभावित करय हंय,