8 पर दानिय्येल न अपनो मन म ठान लियो कि ऊ राजा को जेवन खाय क, अऊर ओको पीवन को अंगूरीरस पी क अपवित्र न होये; येकोलायी ओन मुख्य प्रधान सी बिनती करी कि ओख अपवित्र न होनो पड़े। 16 तब जो जेवन की व्यवस्था करत होतो ऊ मुखिया उन्को जेवन अऊर उन्को पीवन लायी ठह्यरायो हुयो अंगूरी रस दोयी छुड़ाय क, उन्ख सब्जी भाजी देन लग्यो।