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Filipenses 2

मसनमरतअऊर महनत

1 मसहरवन मजबकरय हय, ओकभलवय हय, अऊर आतहरसहभिहय, अऊर करअऊर सरों रति तरस हय, 2 करि एक मन रहो, अऊर एकच , अऊर एकच ि, अऊर एकच मनसरखो। 3 िपन अऊर घमणकरन लसमत करो, पर नतएक सरों अपनअचसमझो। 4 हर एक अपनिनहीं बलसरों ििकरे। 5 जसमसवभवसहरवभो;

6 अपनवरयददपि परमवर वरो,

पर ओन अपनआप परमवर जसरहनो, यदहय असओन नहीं।

7 बलअपनआप असकर िो,

अऊर वक वररन कर िो,

अऊर आदम

समनतभय गयो।

8 अऊर आदमरगट अपनआप नरमकरयो, अऊर यहां तक आजरहि तक पहुंगयो,

करयो।

9 वजह परमवर ओख ऊचऊचतक उठो,

अऊर ओख िसब उततम हय,

10 ि वरअऊर धरतपर अऊर धरतखल,

ि सब

पर टने;

11 अऊर परमवर ि

महिहर एक बलकरेंि मसहच रभआय

जगत रकचमकय हय

12 िो, तरह हमआजनत आयहय, वसअब नहीं वल रहतपर िकर अब रहनपर डरतअऊर पतअपनअपनउदकरतो; 13 कहि परमवरच आय अपनकरन िलय हय अऊर ओकभलउदअनचलन बल वय हय

14 सब िियत अऊर ििकरतरहो, 15 िरषअऊर ों परमवर िकलसनबनरहो, उनचमकजसआशमचमकय हय, 16 जब उनवन सनवय हयतब जवर मसआवन िपर घमणकरन वजह ि हनत अऊर नहीं गयी।

17 यदि हरिबलिअऊर अपनबहपड़ें, तब मय हय, अऊर सब हय18 वसरहअऊर मनो।

िअऊर इपफ

19 रभआशहय ि मय िहरजवर रतच ूं, हरखबर हन िे। 20 कहि जवर सरों नहजवर वना, मन हरिकरे। 21 कहि सब अपनरह, नहीं ि मसी। 22 पर ओख परखअऊर िहय ि जसकरय हय, वसओन समकरयो। 23 आशहय ि जसपड़ेंि हय, मय ओख जलं। 24 अऊर रभभरहय ि मय हरजवर जलआऊं।

25 पर मय इपफअऊर वक अऊर सहकरअऊर हर, अऊर जरों करन हय, हरजवर जनजरसमझो। 26 कहि ओकमन सब लगो, वजह अऊर ििरहत कहि ओको। 27 सचमभय गययहां तक ि मरन पर ो, पर परमवर ओकपर दयकरी, अऊर वल ओकपर नहीं पर पर ि पर मत 28 मय ओख जन अऊर िकरयि ओकिकर अऊर कम े। 29 रभओकबहओकगत करजो, अऊर असों आदर करजो, 30 कहि मसअपनपर िउठजवर आय गयो, कमहरतरफ भयओख करे।

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