लक्ष को तरफ दौड़नो
12 यो मतलब नहीं कि मय न पा लियो हय, यो सिद्ध भय गयो हय; पर ऊ पुरस्कार ख जितन लायी दौड़्यो जाऊ हय, जेको लायी मसीह यीशु न मोख पकड़्यो होतो। 13 हे भाऊवों अऊर बहिनों, मोरी भावना या नहाय३:१३ नहीं; कुछ हस्तलेखों म अब तक नहाय कि मय पकड़ चुक्यो हय; पर यो एक काम करू हय कि जो बाते पीछू रह गयी हंय उन्ख भूल क, आगु की बातों को तरफ बढ़तो चल्यो जाऊं हय। 14 लक्ष को तरफ दौड़्यो चल्यो जाऊ हय, ताकि ऊपर को स्वर्गीय जीवन को इनाम पाऊ, जेको लायी परमेश्वर न मोख मसीह यीशु म ऊपर बुलायो हय।
15 हम म सी जितनो आत्मिकता म सिद्ध हंय, ऊ योच दृष्टिकोन रखे, अऊर यदि कोयी बात म तुम्हरो अऊरच बिचार हय त परमेश्वर ओख भी तुम पर प्रगट कर देयेंन।