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João 12

पर अततर लन

1 फसह िपहितनिांआयिजर ो, मरयकरयो। 2 उत उनओकजन करयो; अऊर करत ी, अऊर जर उनएक ओकवन करन ो। 3 १२:३ लूका ७:३७,३८तब मरियम जटांअरधटर बहमतअततर पर ो, अऊर अपनों ओको; अऊर अततर गनघर गनिभय गयो। 4 पर ओकों यहइसकरिएक ओख पकडपर ो, कहन लगो, 5 "अततर ांिगरों कहनहीं िगयो?" 6 ओन नहीं कहीं ि ओख गरों िपर ि ो, अऊर ओकजवर उनि रहत अऊर ओको, िो।

7 कहो, "ओख रहन े। ओख ़्िरखन े। 8 कहि गरहरहमरह, पर मय हरहमनहीं रहूं।"

जर ि

9 जब यहिों बड़ी गयि उत हय, ि नहीं वल वजह आयपर ि जर े, ओन मरयकरयो। 10 तब जकों जर लन रचो। 11 कहि ओकवजह बहयहचलगयअऊर पर िकरयो।

यरशलिजयरव

12 सरों िबहों आयि यरशलआय रहहय13 उनखजडगधरअऊर ओकेंकरन िकलो, अऊर रन लगो, "परमवर महिो! धनइसएल ा, रभआवय हय"

14 जब गधएक बछड़ा िो; ओकपर गयो, जसिहय,

15 "िी, मत डर;

, गधबछड़ा पर

सवआवय हय"

16 ओकों पहिनहीं समझो, पर जब महिरगट भयउनआयि ओकिअऊर ों ओकतरह यवहकरयो।

17 तब उन ों गवी, समय ओको, जब ओन जर कबमरयकरयो। 18 वजह ओकिलन आयकहि उनि ओन आशचरििहय19 तब फरिों आपस कहो, "सहि नहीं बन पडो, जगत ओकचलन लगहय"

रयहिों ूंढन

20 आरधनकरन आयउनरयहिों ो। 21 उनगलरदतसनगर रहन ििजवर आय ओकिनतकरी, "मह, हम खनहज"

22 ििआय अनिकहो, तब अनिअऊर ििकहो। 23 पर उनकहो, "समय आय गयहय ि आदममहिो। 24 मय सच सच कहहय ि जब तक गहूं जमिमर नहीं वय, अकरहहय; पर जब मर वय हय, बहफर वय हय25 १२:२५ मत्ती १०:३९; १६:२५; मरकुस ८:३५; लूका ९:२४; १७:३३अपनिनय हय, ओख वय हय; अऊर जगत अपनअपिनय हय, अननवन ओकरककरें26 यदि करे, ा; अऊर िमय हय, उत वक ेंयदि करें, ओकआदर करें

मरन इश

27 "अब परहयअब मय कहूं? िा, घड़ी बच?असनहीं पर मय वजह घड़ी तक पहुंहय28 िा, अपनमहिकर" तब वरआवभयी।

"मय ओकमहिकरहय, अऊर िकरू।"

29 तब खड़ो रहउनकहि दर गरजो। सरों कहो, "वरगदओको।"

30 पर कहो, "शबनहीं, पर हरआयहय31 अब जगत वय हय, अब जगत सक ििें; 32 अऊर मय यदि धरतपर ऊचपर चढ़ां, सब अपनजवर ूं।" 33 असकहओन रगट कर िि कसमरें

34 पर ों ओककहो, "हम यवसहय ि मसहमरहें, तब तय कहकहहय ि आदमऊचपर चढ़ाजरहय? आदमआय?"

35 उनकहो, "ि अब ़ी तक हरहयजब तक ि हरहय तब तक चलतरहो, असनहीं ि अनआय े; अनचलय हय नहीं नय ि िवय हय36 जब तक ि हरहय, ि पर िकरि ि सनबनो।"

यहिों अविबनरहन

कहचलगयअऊर उनरहो। 37 ओन उनआगइतनआशचरििो, तब उनओकपर िनहीं करयो; 38 ि यशभवियवकवचन ओन कहो:

"रभु, हमरसमिकरयहय?

अऊर रभजबल पर रगट भयहय?"

39 वजह ि िनहीं कर सको, कहि यशकहहय:

40 "ओन उनअनो,

अऊर उनमन कठकर िहय;

कहीं असनहीं ि ि े,

अऊर मन समझे,

अऊर तरफ िे,

अऊर मय उनकरू।"

41 यशकहीं ि ओन ओकमहिी, अऊर ओन ओककरी।

42 तब अधििों बहओकपर िकरयो, पर फरिों वजह रगट नहीं नत ो, कहीं असनहीं ि ि आरधनलयों ििें: 43 कहि आदमिों तरफ बड़ाउनपरमवर तरफ बड़ाअपबहिलगत ी।

वचन: आध

44 कहो, "पर िकरय हय, पर नहीं बलजन पर िकरय हय45 अऊर खय हय, जन खय हय46 मय जगत ि आयहय, ि पर िकरेंअननहीं रहें47 यदि नहीं ें, मय ओख नहीं ठहर; कहि मय जगत ठहरनहीं, पर जगत उदकरन आयहय48 नय हय अऊर नहीं करय हय ओख ठहरएक हय: ि वचन मय कहहय, उच िछलिओख ठहरें49 कहि मय अपनतरफ नहीं करी; पर हय ओन आजहय ि कहूं अऊर ू? 50 अऊर मय हय ि ओकआजअननवन आयमय हय, जसकहहय वसहय"

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