24 हे बाप, मय चाहऊ हय कि जिन्ख तय न मोख दियो हय, जित मय हय उत हि भी मोरो संग हो, कि हि मोरो ऊ महिमा ख देखे जो तय न मोख दी हय, कहालीकि तय न जगत की उत्पत्ति सी पहिले मोरो सी प्रेम रख्यो।
24 हे बाप, मय चाहऊ हय कि जिन्ख तय न मोख दियो हय, जित मय हय उत हि भी मोरो संग हो, कि हि मोरो ऊ महिमा ख देखे जो तय न मोख दी हय, कहालीकि तय न जगत की उत्पत्ति सी पहिले मोरो सी प्रेम रख्यो।