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मत्ती 18

िदयवक

21 १८:२१ लूका १७:३, तब पतरस जवर आय ओककहो, "रभु, यदि अपरकरतरहो, मय ितनओख करूं? तक?"

22 ओककहो, "मय नहीं कहूं ि तक, बलसततर तक" 23 वरजसहय, अपनवकों िो। 24 जब िलगो, एक ओकजवर गयकऱो करजदो। 25 जब ि करवन ओकजवर नहीं ो, ओकिकहो, "अऊर पतअऊर ल-बचअऊर हय सब े, अऊर करिे। 26 पर वक िओख रनकरयो, अऊर कहो, िरज धर, मय सब भर ं।" 27 तब वक िदयकर ओख िो, अऊर ओककरकर िो।

28 "पर जब वक िकलो, ओकवकों एक ओख िओककरजदो; ओन ओख पकडओकिचकलअऊर कहो, पर करहय भर े।’ 29 पर ओकवक ओकपर िओकिनतकरन लगो, रज धर, मय सब भर ं।’ 30 ओन नहीं ो, पर ओख लखिि जब तक करभर नहीं तब तक उतच रहे। 31 ओकवक भयओख बहउदभयो, अऊर अपनिबतिो। 32 तब ओकिओख ओककहो, वक, तय िनतकरी, मय करकर िो। 33 जसमय पर दयकरी, वसअपनवक पर दयकरननहीं हत ो?’ 34 अऊर ओकिआय ओख सजौंिो, ि जब तक करभर नहीं े, तब तक उनरहें

35 "यदि हर एक अपनमन नहीं करें, वरहय, वसकरें"

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