धन्य वचन
3 "धन्य हंय हि, जो मन को नरम हय,
कहालीकि स्वर्ग को राज्य उन्कोच हय।"
4 "धन्य हंय हि, जो शोक करय हय,
कहालीकि हि समाधान पायेंन।"
5 "धन्य हंय हि, जो नम्र हंय,
कहालीकि हि धरती को वारीसदार होयेंन।"
3 "धन्य हंय हि, जो मन को नरम हय,
कहालीकि स्वर्ग को राज्य उन्कोच हय।"
4 "धन्य हंय हि, जो शोक करय हय,
कहालीकि हि समाधान पायेंन।"
5 "धन्य हंय हि, जो नम्र हंय,
कहालीकि हि धरती को वारीसदार होयेंन।"