व्यक्तिगत अभिवादन
1 मय तुम सी फीबे को लायी जो हमरी बहिन अऊर किंख्रिया की मण्डली की सेविका आय, बिनती करू हय 2 कि तुम, जसो कि परमेश्वर को लोगों ख होना, ओख प्रभु म स्वीकार करो; अऊर जो कोयी बात म ओख तुम्हरी जरूरत हो, ओकी मदत करो, कहालीकि ऊ भी बहुतों की बल्की मोरी भी मदत करन वाली होती।