15 का तुम नी जाना कि तुमारो सरीर मसी को अंग आय? ते का म मसी को सरीर ले ख उन ख छिनाला पना हुन को जीवन बनाऊँ? कभी नी। 16 का तुम नी जिन्दगी कि जो कोई गलत काम से रह हैं, उ ओखा संग एक सरीर हो जाहे हैं? काहेकि लिखो हैं: "वी दूई एक तन होए।" 17 अऊर जो प्रभु कि भक्ति म रह हैं, उ ओखा संग एक आत्मा हो जाए हैं।
18 गलत काम से बचो रह, जितनो भी पाप अदमी करिये हैं वी जीवन का बाहर ही हैं, पर सरीर गलत काम करन वाला अपनी ही जीवन का विरोध पाप करिये हैं। 19 का तुम यू नी मालूम हैं कि तुमारो सरीर सुध्द आत्मा को मन्दिर आय, जो तुम म बसो भयो हैं अऊर तुम ख परमेस्वर कि तरफ से मिलो हैं; अऊर तुम अपनो नी हैं? 20 काहेकि तुम लोग पैसा देख ख खरीदो लियो गयो हैं, एकोलाने तुम लोग अपनो सरीर ख दुवारा परमेस्वर कि बड़ाई करे।