32 अब म यी चाहूँ हैं कि तुम ख चिन्ता न हो। जेन कि सादी7:32 अविवाहित नी भई (अविवाहित) अदमी प्रभु कि बात हुन की चिन्ता म रय्हे हैं कि प्रभु ख कसो खुस रखू। 33 पर जीन कि सादी हो गई (विवाहित) अदमी दुनिया कि बात हुन कि चिन्ता म रय्हे हैं कि अपनी घरवाली ख किस तरका से खुस रखू। 34 जीन कि ब्याह होए (विवाहित) अर जीन कि ब्याह नी भई ओ म भी कुछ पाप हैं: जीन की ब्याह नी भई उ प्रभु कि म रय्हे हैं कि उ सरीर अर आत्मा दूई म सुध्द होए, पर जीन की ब्याह होऐ दुनिया कि आसा म रय्हे हैं कि अपनो घरवालो ख कसो खुस रखू।
35 मी यू बात तुमारो ही फयदा का लाने कहूँ हैं, न कि तुम ख फँसान का लाने, पर एकोलाने कि जसो सोभा देव हैं, वसो ही कियो जाहे, कि तुम एक मन हो ख प्रभु कि सेवा म लगो रह।