3 काहेकि परमेस्वर कि इच्छा या हैं कि तुम सुध्द बननो: एकोमतलब गलत काम से बचियो रहनो, 4 अर तुम म से हर एक इंसान धीरज धर ख अपनो सरीर ख सुध्दता बना ख रखो अर ओकी इज्जत करो। 5 अर यू काम मर्जी से नी, अर न वा जात को समान जो परमेस्वर ख नी जाना, 6 कि या बात म कोई अपनो भई ख नी ठगन को, अर न ओपर हुकुम चलाय, काहेकि प्रभु असी सब बात हुन को पलटा लेन वालो हैं; जसो की हम न पहिले ही तुम से बोल दियो अर जतायो भी हतो। 7 काहेकि परमेस्वर न हमका असुध्द होन को लाने नी, पर सुध्द होन को लाने बुलायो हैं।
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