4 अर तुम म से हर एक इंसान धीरज धर ख अपनो सरीर ख सुध्दता बना ख रखो अर ओकी इज्जत करो। 5 अर यू काम मर्जी से नी, अर न वा जात को समान जो परमेस्वर ख नी जाना,
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4 अर तुम म से हर एक इंसान धीरज धर ख अपनो सरीर ख सुध्दता बना ख रखो अर ओकी इज्जत करो। 5 अर यू काम मर्जी से नी, अर न वा जात को समान जो परमेस्वर ख नी जाना,