10 काहेकि जे दुख परमेस्वर कि इच्छा अनुसार ग्रहण करियो जाय हैं, ओको परिनाम होय हैं मन पस्चाताप अर छुटकारा ओ म पछतावा नी पड़ हैं। पर दुनिया को दुख ख परिनाम हैं मरन। 11 अब देख, या बात से कि तुम ख परमेस्वर भक्ति ख दुख भयो तुम म कित्ता कि धुन अर हर एक जवाब7:11 प्रत्युतर अर गुस्सा, अर डर, अर लालसा, अर धुन अर सजा देन ख विचार उत्पन्न भयो? तुम न सब तरह से यू पुरो कर दिख्यो कि तुम यू बात म बेकसूर हैं।
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2 कुरिन्थियो 7
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