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2 Tessalonicenses 3

थनकरन अन

1 आख, अरबहिनह!, हमरिनत करतरहनि रभवचन असअर महि, अर सब जगअसईल जसि नहभयैं; 2 अर हम अर बच ि सभि

3 पर रभभरयक ैं। मजबकर रखअर मरखभकर रखो। 4 हमकरभऊपर भरैं हमरकहैं अऊर नतरहे।

5 रभमरमन परमवर अर मसरज तरफ अगकरे।

आलसि

6 अर, हम मकअपनरभमसजतऊ ैं ि भई-बनअलग रहो, करअर ि ििचला, हम िैं। 7 ि ैं ि कसतरहमजसचलनि, ि हम मररहतबखत कभआलसरया, 8 हम यहाँ कट ा, बलि हम बड़ी महनत िन-रकरतरयि पर बने। 9 असहमकहक , बलि हम मरमनएक नमबन रहे, ि हमरजसचलो। 10 ि जब हम मरइतहता, तब हमनियम िरहा; अदि करनहवि

11 अब हमननआवैं ि आलससमिदगिैं। करअऊर सरअढैं। 12 असहम रभमसजतैं, अर उन िनतकरैं ि पचकरतअर दककमई

13 , अर, भलई करनिमत मत रनो। 14 अदि हमरिबते, ओपर नजर रखअऊर ओसे, जसअपनपर सरमि15 ओकजसबरमत करनो, बलि ओखभई बहिजससमझ

आखरसबआस

16 अब रभि आय हर बखत अर हर तरि ! रभसब !

17 ी, , अपननमसिरयैं। सब िि िैं। असतरिैं।

18 हमररभमसि िरपसब बन!

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2 Tessalonicenses
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