1तुम म जो सियाना हैं, म उन का जसो पुराना अर मसी हुन को दुख हुन ख गवाही अर परगट होन वाली बड़ाई म संग होय ख उन ख यू समझ हैं।
11उही का समराज हमेसा हमेसा रहे। आमीन 5:11 आमीन
14प्रेम को चुमा से एक दुसरा ख नमस्कार कर।तुम सब ख, जो मसी म हो, सान्ति मिलती रह।