18 हे ओरत हुन, जसो प्रभु म उचित हैं, वसो ही अपनो अपनो पति को अधीन रहो।
19 हैं अदमी हुन, अपनी अपनी ओरत से प्यार रखो, अर उन को संग कठोर व्यवहार न करो
18 हे ओरत हुन, जसो प्रभु म उचित हैं, वसो ही अपनो अपनो पति को अधीन रहो।
19 हैं अदमी हुन, अपनी अपनी ओरत से प्यार रखो, अर उन को संग कठोर व्यवहार न करो