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Eclesiastes 2

ि

1 अपनमन कहयो, "चल, अब ग-विपरखुँो, ऐककर" पर भयि ै। 2 कहयो, "गलपन आय," अऊर , "ओसिै?" 3 मन िि तरि बनरहअऊर (खमधु) रस वन तरबहलअऊर कसखतपकड़ो रहूँ, जब लक करूँ ि अपनिदगभर करतरहवै।

4 बड़ा-बड़ा करया; अपनघर बनविअऊर अपनबगलगवो; 5 अपनाँअर बगलगवो, अऊर उन तरा-तरफल लगवा। 6 अपनवलदविि उन बगओलिलगरह 7 अर ी, अऊर घर भया; अऊर िपहियरसलउन कई गईया-बईल अऊर बकरिो। 8 ाँअर अऊर अर ि िमतो; यक अऊर िरखो, अऊर ़ेरखी, ै, कर ी।

9 असतरपहिसब यरसलबड़ो अऊर धनगयो; ि िो। 10 अऊर िखन लच करी, सभखन ो; मन तरगन ि मन सब हनत रन भयो; अऊर हनत िो। 11 तब िसब , अऊर सब हनत ो, ि सब अऊर हवपकडजसै, अऊर रज यदी।

अऊर खतसब

12 िमन ़िि ि अऊर गलपन अऊर खतूँ; ि िआएो, वहकरो? िरप उई, चलआयै? 13 तब ि उजिअनिउततम ै, उति रखतउततम ै। 14 िकदै, ओकुंरहवै, पर अनिचलह ै; िि दसएक जसै। 15 तब मन कहयो, "जसदसयगो, वसएगो; ििकदभयो?" अऊर मन कहयि ै। 16 ि िकदअऊर रख ददहमबनरहो, पर भविसब िएगो। िकदकससममरै।

हनत

17 एकअपनिदगपसगयो, ि रज करखरभया; ि सब कहअऊर हवपकडजसै। 18 हनत बल रज करपछतो, ि जरि ओकफल आएो। 19 असनह ि िकदयगरख? रज िहनत करिो, अऊर ओकिलगसब उई अधियगो। ै। 20 तब अपनमन हनत रज िकरयपछतो, 21 ि असै, हनत अऊर िअऊर अऊर सफल ै, ओकअसपड़ा ै, कई हनत करयो। अऊर ै। 22 रज मन लगलगहनत करह ओसओकयदै? 23 ओकसब िभरिरहवै, अऊर ओकै; ओकमन ा। ै।

24 न-पवन अऊर हनत करतअपनरखन िअऊर अची। ि परमवर ओर िलह ै; 25 ि परमवर सकअऊर मनसकै? 26 परमवर नजर अचै, ओकि अऊर अऊर आननै; पर भरि ओकवन ़ीलगपरमवर नजर अचै। अऊर हवपकडजसै।

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