18 अर उ तुम इंसान हुन कि मन की आँख कि ज्योत खोले, जसो तुम यू देख सके कि ओको वजे से बुलायो जान को लाने तुम इंसान हुन की आसा कित्ती बड़ी हैं अऊर सुध्द लोग को संग तुम इंसान हुन ख जो जगह मिली हैं, वा कित्ती ऐस आराम से मेहमामय हैं,
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