22 कि तुम पिछलो चाल चलन को पुरानी इंसानीयत ख जो बहकान वाली मन की मर्जी को हिसाब से भ्रस्ट होते जावा हैं, उतार डालनू।
22 कि तुम पिछलो चाल चलन को पुरानी इंसानीयत ख जो बहकान वाली मन की मर्जी को हिसाब से भ्रस्ट होते जावा हैं, उतार डालनू।