अदमी अर ओरत
22 ओरत हुन, अपनो अपनो अदमी को असो बस म रहो जसो प्रभु को। 5:22कुलुस्सियो 3:18; 1पतरस 3:1; उत्पत्ति 3:16 23 काहेकि अदमी ओरत की मुंडी आय जसो की मसी कलेसिया की मुंडी आय अऊर ऊईच ही सरीर को उध्दार करन वालो हैं। 24 पर जसी कलेसिया मसी को बस म हैं वसीच ही ओरत हुन भी हर बात म अपनो अपनो अदमी को बस म रहे।
25 अदमी हुन, अपनी अपनी ओरत से प्रेम रखनू जसो मसी न भी कलेसिया से प्रेम कर ख अपनो तुम ख ओको लाने दे दियो। 26 कि उन ख वचन को दुवारा पानी को सपड़नो से सुध्द कर ख सुध्द बनाय, 27 अऊर ओ ख एक जोर दार उजेरो देन वाली कलेसिया बना ख अपनो जोने खड़ी करे, जेमा न कलंक, न झुर्री, न कोई अऊर असी चीज होय पर सुध्द अर बेकसूर होनो। 28 असोच ही तरीका से जरूर हैं की अदमी अपनी अपनी ओरत से अपनो सरीर को समान प्रेम रखे। जो अपनी ओरत से प्रेम रखा हैं, उ अपनी तुम से प्रेम रखा हैं। 29 काहेकि कोई न कभी अपनो सरीर से बैर नी रखो पर ओको पालनो-पोसनो करा हैं, जसो मसी भी कलेसिया को संग करा हैं। 30 एकोलाने कि हम ओको सरीर का धड़ आय। 31 "एकोलाने इंसान अपनो माय-बाप ख छोड़ ख अपनी घरवाली से मिलो रहेगो, अऊर वी दोई एक तन या सरीर होयगो।"5:31 उत्पत्ति 2:24 32 यू भेद तो बडो हैं, पर मी असो मसी अर कलेसिया को बारे म कहूँ हैं। 33 पर तुम म से हर एक अपनी घरवाली से अपनो समान प्रेम रखे, अऊर घरवाली भी अपनो घरवालो को डर माने अऊर सम्मान करनो चाहिये।