11 तरत म हर तरह क तडन खस क न, पर द: ख ह क बत दखई पड ह; तभ ज ओ ख सहत-सहत मजबत ह गय ह, बद म उन ख चन क सग धरम क फल मलह ह
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11 तरत म हर तरह क तडन खस क न, पर द: ख ह क बत दखई पड ह; तभ ज ओ ख सहत-सहत मजबत ह गय ह, बद म उन ख चन क सग धरम क फल मलह ह