4 याहा उन अदमी हुन को लाने असंभव हैं ज्योति को प्रात हो गयो हैं। जिन न स्वर्गीय उपहार को स्वाद चखो हैं अऊर जे सुध्द आत्मा सह भागी हुया हैं। 5 जिन न परमेस्वर अर जीन ख परमेस्वर को उत्तम वचन को अर आवन वाली दुनिया की सक्ति को सवाद चख चुक्यो हैं, 6 अदि वी भटक जाए ते उन ख मन फिरान को लाने फिर नयो बननो उन ख बड़ो मूसकिल हैं, वी अपनो नुकसान को लाने वी हर बार परमेस्वर को पोरिया ख क्रूस पर चढ़ा रहया हैं। अऊर उन ख सब अदमी हुन को सामे अपमान कर रहया हैं।