चोक्खी सामरी को उदाहरन
25 अर देख, एक व्यवस्थापक उठियो अर यू कह ख ओकी परिक्छा करन लगियो, "हे गुरू अनन्त जीवन का वारिस होन को लाने मी का करूँ?"
26 यीसु ओ से कहयो, "नेम म का लिखो हैं? तू कसो पढ़त हैं?"
27 ओ न उत्तर दियो, "तू प्रभु अपनो परमेस्वर से अपनो सारो मन अर अपनो साक्ति अर अपनो सारी बुध्दि का संग प्रेम रख, अर अपन बाजू वालो से अपनो समान प्रेम रखनो।"
28 अऊर यीसु न ओसे न कहयो, तुम न अच्छो जवाब दियो यू कर अऊर तुम जिन्दगी मिले।;
29 पर ओ ना अपना तुम का धर्मी ठहरान की इच्छा से यीसु से पूछो, "ते मेरो पड़ोसी कऊन हैं?"
30 यीसु न उत्तर दियो, "एक अदमी यरूसलेम से यरीहो को जा रहे हतो कि डाकू हुन न घेरकर ओके कपड़ा उतार लाने अर मार पीट ख ओखा अधमरा छोड़कर चलो गयो।" 31 अर ऐसो हुओ कि उ रस्ता म से एक याजक जा रहे हतो, परन्तु ओखा देख कर अनदेखा कर चलो गयो। 32 इ रीति से एक लेवी उ जगह पर आयो, वी भी ओखा देख ख देखा कतरा ख चलो गयो 33 परन्तु एक सामरी यातरी वहाँ आ निकल, अर ओ ख देखकर तरस खायो। 34 ओ ना ओके नजीक आकर ओके घावो पर तेल अर अंगूर को रस ढ़ालकर पट्टियाँ बाँधी, अर अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय म ले गयो, अर ओकी सेवा टहल की। 35 दुसरो दिन ओ ना दो चाँदी सिक्का निकलकर सराय का मालिक को दियो, अर कहयो, ऐ की सेवा टहल करनु, अर जे कुछ तोरो अर लगेगो, "उ मी लउटनू पर तोखा दे दूँगो।"
36 यीसु न कहयो, अब तोरी समझ म जे डाकू हुन म घिरि गयो हतो, "उ तीनो म से ओको पड़ोसी कऊन होए?"
37 अऊर ओ न कहयो, "वही जे न उ पर दया कियो।"
यीसु न ओ से कहयो, "जा तू भी असो ही कर।"