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लूका 16

धनअदमअर िधन जर

19 "एक धनवअदमहतजनकपड़ा अर मलमल पहिअर रतिििअर रहत हत20 जर एक खतभरिओकपर िहता, 21 अर हत हति धनवपर ठन अपनभरे; यहाँ तक ि आकर ओकखतटत रह22 असभयि मर गयो, अर वरगदकर अबहम पहुँो। धनवमरअर ़ो गयो। 23 अर अध़ा पड़िअपन ी, अर अबहम जर ो। 24 तब कर कहयो, िअबहम, पर दयकर जर े, ि अपनगलििकर करे, ि आगतडरयूँ।’ 25 पर अबहम कहयो, िमरण कर ि अपनवन अचवसैं, अर वसजर वसु: परनअब यहाँ ि पर रयैं, अर तडरयैं। 26 सब हमअर एक गडठहरगयैं ि यहाँ नजूँ, सको; अर वहाँ हमनजसको।’ 27 कहयो, ििनतकरत ूँ ि िघर , 28 ि ाँभई अर ैं; ओकगवे, असि ़ा जगह आए29 अबहम ओसकहयो, ओकनजअर भवियवकिैं, ओके।’ 30 कहयो, ी, िअबहम; पर यदि मरओखनज, मन िएगो।’ 31 ओसकहयो, जब अर भवियवकनह, यदि मरउठओको’।"

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