1 फिर ओ न ओको बारे म रोज प्रार्थना करनु अर हियाव नी छोडनू चाहिए, अर यी उदाहरन कहयो: 2 "कोई नगर म एक न्याय करन वालो रहत हतो। जे नी परमेस्वर से डरत हता नी कोई अदमी की परवाह करत हतो। 3 उ ई नगर म एक विधवा भी रहत हती, जे ओके पास आय-आय का बोलत हती, ‘मोरो न्याय चुकाकर मोखा मुद्दई से बचा।’ 4 कुछ बखत तक ते उ नी मानो पर अन्त म मन म विचार कर कहयो, यदपि मी नी परमेस्वर मीन से डरनो, अर नी अदमी हुन की कुछ परवाह करतो हूँ; 5 तोभी यू विधता मोखा सतात रह हैं, एकोलाने मी ओखा न्याय चुकाऊँगो, कही असो नी हो कि घड़ी-घड़ी आकर अन्त मोरी नाक म दम कर देहे।"
6 प्रभु न कहयो, "सुन, यू अधर्मी न्याय करन वालो का कहा हैं? 7 एकोलाने का परमेस्वर अपनो चुनो हुओ को न्याय नी चुकाएगो जे रात-दिन ओकी दुहाई देत रवा हैं। का उ ओके बारे म देर करेगों? 8 मी तोसे कहूँ हूँ उ तुरंत ओको न्याय चुकाएगो। तोभी इंसान को पोरिया जब आएँगो, ते का उ जमीन पर विस्वास पाएगो?"