पतरस का इंकार करनु
54 फिर वी ओ ख पकड़ ख ले गया, अर मुख्य याजक को घर म लायो। पतरस दुर ही से ओके पिछु-पिछु चलत रहा हतो; 55 अर जब वी आँगन म आग परचा ख इकठ्टे बैठिया, ते पतरस भी उनको बीच म बठ गयो। 56 तब एक दासी ओ ख आगी को उजियाला म बैठो देख का अर ओकी तरफ देख ख कहन लगी, "यू भी तो ओके संग हतो।"
57 पर ओ ना यू बोल ख मुंडो कर लियो कियो, अरे बाई (नारी), मी ओ ख नी जानु।
58 थोड़ी देर बाद कोई अऊर न ओखा देख ख कहयो, "तू भी ते उन्ही म से हैं।" पतरस न कहयो, "हे अदमी मी नी हूँ।"
59 कुछ कोई घंटा हुन का बाद एक अर अदमी विस्वास से कहन लगियो, "सच यू भी ते ओको संग हतो, काहेकि यू गलीली हैं।"
60 पतरस न कहयो, "हे इंसान, मी नी जानत कि तू का कहत हैं!"
उ कह ही रय्हो हतो, कि तुरत मुर्गा न बाँग दियो।
61 तब प्रभु न घूम ख पतरस का तरफ देखियो, अर पतरस का प्रभु की उ बात याद आयो जे बात ओ न कय्ही हती: "आज मुर्गा को बाँग देन से पहलो, तू तीन बार मोरो इंकार करेगों।" 62 अर उ बाहर निकल ख फूट-फूट ख रोन लगियो।