सुखो हात वालो अदमी का चंगा करनु
6 अऊर असो भयो कि कोई आराम को दिन वी प्रार्थना घर म जाकर सिक्छा (उपदेस) करन लगियो; अर वाहा एक अदमी हतो जेका जेवनो हात सुखो हतो। 7 सासतिरी अर फरीसी ऐ पर इज्जाम लगानो का बखत पानो की ताक म हतो की देखे आराम को दिन म चंगो करत हैं कि नी। 8 परन्तु वी ओके विचार जानन हतो; एकोलाने ओ ना सुखो हात वालो अदमी से कहयो, "उठ, बीच म खड़ो हो गयो" वी उठ खड़ो हुओ। 9 यीसु न ओसे कहयो, "मी तुम से यु पुछत हूँ कि छुट्टी को रोज का ठीक हैं, अच्छो करनु; या बुरो करनु; प्रान को बचानो या नास करन?" 10 तब ओ न चारो तरफ उन सभो का देखकर उ अदमी से कहयो "अपनो हात बढ़ा।" ओ ना ऐसी ही कियो, अर ओखा हात फिर चंगो हो गयो।