अपनो भई की नास को करन मत बन
13 एकोलाने हम एक दूसरो ख दोस लगान छुड़ा ख आपस म निस्चय कर ले कि कोई अपनो भई ख रस्ता म ठोकर ख कारन म नी पैदा कर अर बनो। 15 पर तोरो भई तोरो जोवन का कारन नाराज14:15 उदास होय हैं ते फिर तू प्रेम को तरीका से नी चले हैं ते जे को लाने मसी मरे, ओ ख तू अपनो जोवन को व्दारा खत्म नी कर। 17 काहेकि परमेस्वर को राज खान-पीवन को नी आय, पर धर्म अर मेलमिलाप अर उ सान्ति अर खुसी हैं जे सुध्द आत्मा से होवा हैं।