5 पर अदि तुम म से कोई कि बुध्दि कि घटी होए ते उ परमेस्वर से विनती करे अर ओ ख बुध्दि मिल जाहे काहेकि परमेस्वर खुल्लो हात से अऊर उदारता से सब ख देवा हैं। 6 पर ओ ख भरोसा को संग मागनू चहिए अऊर कुछ सक नी होनू चाहिए काहेकि सन्देह करह हैं उ समुंदर कि लरह को समान होवा हैं, जे हवा से इते-उते उछाली जाय हैं। 7 असो अदमी यू नी समझन को की मो ख प्रभु कि ओर से कुछ मिले। 8 काहेकि असो अदमी दो मन को हैं। अर अपनी पुरी बात म चंचल आय।
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