6 पर ओ ख भरोसा को संग मागनू चहिए अऊर कुछ सक नी होनू चाहिए काहेकि सन्देह करह हैं उ समुंदर कि लरह को समान होवा हैं, जे हवा से इते-उते उछाली जाय हैं।
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6 पर ओ ख भरोसा को संग मागनू चहिए अऊर कुछ सक नी होनू चाहिए काहेकि सन्देह करह हैं उ समुंदर कि लरह को समान होवा हैं, जे हवा से इते-उते उछाली जाय हैं।