भरोसा अर करम
14 अरे मोरा भई अर बहिन हुन, अदि कोई इंसान कहव हैं कि मी भरोसा करहु हैं, पर अदि वी करम नी करा हो, ते ओसे का फायदा? का असो भरोसा कभी ओको उध्दार कर सकह हैं? 15 अदि कोई भई या बहिन नंगा उघडीया हो अर उन ख रोज दिन खाना की घटी हो, 16 अर तुम लोगो म से कोई उन से कहे, "सान्ति से जाओ, तुम गरम-गरम कपड़ा पहिन अऊर भर पेट खाना खाओ", पर वी उन ख सरीर को लाने जरूरत चीज नी देय, ते ऐसे का फायदा? 17 वसो ही भरोसा भी, अदि करम सहित नी होए ते अपना स्वभाव म मरीया हुआ हैं।