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1 कोरिंथ 2:11-13

OHSS Hindi Contemporary Version

11 मनुष्यों में मनुष्य की अंतरात्मा के अतिरिक्त अन्य कोई भी उनके मन की बातों को नहीं जानता. 12 हमें संसार की आत्मा नहीं परंतु वह आत्मा प्राप्‍त हुई है, जो परमेश्वर की ओर से हैं कि हम वह सब जान सकें, जो परमेश्वर ने हमें उदारतापूर्वक प्रदान किया है. 13 हम उनके लिए, जो आत्मिक हैं, आत्मिक बातों का वर्णन मनुष्य के ज्ञान के शब्दों के द्वारा नहीं परंतु आत्मिक शब्दों में करते हैं.

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    11 मनुष्यों के विचारों को उस मनुष्य की आत्मा को छोड़ जो उसमें है, कौन जानता है? इसी प्रकार परमेश्‍वर के विचारों को भी परमेश्‍वर के आत्मा को छोड़ कोई नहीं जानता। 12 परंतु हमने संसार की आत्मा नहीं, बल्कि वह आत्मा पाया है जो परमेश्‍वर की ओर से है, ताकि हम उन बातों को जानें जो परमेश्‍वर के द्वारा हमें उदारता से दी गई हैं; 13 उन्हीं बातों को हम बताते भी हैं, मनुष्यों के ज्ञान के सिखाए हुए शब्दों में नहीं बल्कि आत्मिक बातों की तुलना आत्मिक बातों से करके2:13 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "पवित्र" लिखा है। आत्मा के द्वारा सिखाए हुए शब्दों में।

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    11 मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उसमें है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा। (नीति. 20:27) 12 परन्तु हमने संसार की आत्मा2:12 संसार की आत्मा: वह बुद्धि और ज्ञान नहीं जो यह संसार दे सकता हैं। नहीं, परन्तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं। 13 जिनको हम मनुष्यों के ज्ञान की सिखाई हुई बातों में नहीं, परन्तु पवित्र आत्मा की सिखाई हुई बातों में, आत्मा, आत्मिक ज्ञान से आत्मिक बातों की व्याख्या करती है।

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