2 कि वे परमेश्वर की इच्छा में परमेश्वर के झुंड की देखरेख करें—दबाव में नहीं परंतु अपनी इच्छा के अनुसार; अनुचित लाभ की दृष्टि से नहीं परंतु शुद्ध सेवाभाव में, 3 अपने झुंड पर प्रभुता दिखाकर नहीं परंतु उनके लिए एक आदर्श बनकर; 4 क्योंकि प्रधान चरवाहे के प्रकट होने पर तुम महिमा का अविनाशी मुकुट प्राप्त करोगे.
5 इसी प्रकार युवाओ, तुम प्राचीनों के अधीन रहो तथा तुम सभी एक दूसरे के प्रति दीनता की भावना धारण करो क्योंकि,
"परमेश्वर घमंडियों के विरुद्ध रहते
और दीनों को अनुग्रह देते हैं."5:5 सूक्ति 3:34