5 इसी प्रकार युवाओ, तुम प्राचीनों के अधीन रहो तथा तुम सभी एक दूसरे के प्रति दीनता की भावना धारण करो क्योंकि,
"परमेश्वर घमंडियों के विरुद्ध रहते
और दीनों को अनुग्रह देते हैं."5:5 सूक्ति 3:34
6 इसलिये परमेश्वर के सामर्थ्यी हाथों के नीचे स्वयं को दीन बनाए रखो कि वह तुम्हें सही समय पर बढ़ाएं.