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2 कोरिंथ 9

उदपण

6 रहे: वह, ़ा ै, ़ा तथवह, बहै, बहा. 7 इसलििसनअपनमन ें ितनिचय िै, उतने—िइचिवशतें नहीं ोंि परमवर िवह ै, आनै. 8 परमवर समरैं ि वह ें बहअधिअनरह रदकरें ि ें सब पर्‍ें ्‍रहऔर हर भलिअधिकतें ो, 9 ि पविै:

उनोंों उदरतवक िा;

उनकसचऔर िकतबनरहतै.9:9 स्तोत्र 112:9

10 वह परमवर, िितथजन िआहतजकरतैं, वहिितजतथिकरेंतथिकतउपज ें उन्‍नति करेंे. 11 अपनअपउदरतिरतपकें धनिओगे. हमयम यह उदरतपरमवर रति धनयविषय रहै.

12 यह वकवल पविों रतों करनधन परपरमवर रति उमडधनयवै.

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