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Atos 2

41 ितनों तररवचन िा, उनोंबपतििा. उस िलगभग हज़ायकि उनमें िगए.

नए ििों घनिएकत

42 सभलगिों िरति समरिकर, रसपरिगति, रभु-िऔर थनें रहनलगे. 43 िों िरहअदतथअदिसभिआशचरिषय बन गए े. 44 मससभिघनिएकतें रहनलगतथउनकसब वसपर सबकएक अधिा. 45 अपनपति चकर, िनककम उनमें ांटनलगे. 46 हर िगन ें एक मन ियमिइकटे, जन िएक सरघर ें िमल आनदपवक िजन करत47 तथपरमवर णगकरते. सभरसन्‍नते. परमवर इनमें िन-परतििउनकिरहे, उद्‍कर रहे.

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