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Colossenses 1

1 परमवर इचमसितथहमििओर े,

2 पविों और मसें सचिबहनों ो,

हमिपरमवर ओर अनरह और ांि.

आभयकि और थन

3 िथनकरतसमय हम हमरभमसिपरमवर मनहमअपनआभरकट करतैं, 4 ोंि हमनमसें ितथसभपविों रति िषय ें ै. 5 इनकआधवह िऔर उपजउस आशआपकिवरें रखतथिसकिषय ें पहलसचवरणनउदसमें 6 िमन्‍िै, यह समलगें और ममें उसिऔर फल रहै, ििमनइसऔर ें तभपरमवर अनरह अहस. 7 िमनहमिसहकरएप़्ा, िमससचवक ै. 8 वह हमें पविआतें िषय ें िकरतरहै.

9 इसरण ििहमनयह ै, हमनिथनकरननहीं ़ा और हम यह िनतकरतैं ि आतिऔर समझ ें परमवर इचें भरप, 10 ि वभरभो, उनें हर रकरसन्‍करनो, हर एक भलें फलदतथपरमवर ें उन्‍नत , 11 सहनशलतऔर रज िउनकमहिशकि अनमरबलवतथ12 िआभो, िोंें ि ें पविों ें ििबनिा. 13 ोंि वहहमें धकवश िलकर अपनिें आए ैं. 14 उनीं ें हमटका, अरषमै.

मसि िमणि

15 वह अनदपरमवर वरैं. वह ि ें पहलैं. 16 ोंि उनीं ें सब रचगयै—वरों ें तथपर, तथअनदी, िंसन तथरभं, तथअधिी—सभउनीं तथउनीं िबनगया. 17 वह ि ें रथम ैं और ि उनमें िरहतै. 18 वहिकलिे, उनकशरै; वहआदि ै, मरें उठनों ें पहलैं ि वहसब ें रधों. 19 ोंि िरसन्‍नतइसें ि उनमें परिणतकरऔर वह 20 पर उनकबहगए लहांि पनकर उनकयम सभिवर, वयल-मिकरं.

21 ांि इसकपहलों रण परमवर अलग तथमन ें रभा. 22 िअब मसअपनिें ल-मिकरवि वह ें परमवर मनपवि, ितथिकलें उपसिकरें, 23 ि तव ें िें बनरहतथढतवक िरहतउन्‍नत , और ईशवरसमें बसआश़ो, िमना, िसकषणवरि ें गई और ैं, , िसकवक गया.

अनयजिों ें रम

24 अब ैं िअपनकषों ें रफिूं तथैं उनककलििअपनशरें मसतनें रह गई कमकरतअपऩिकर रहूं. 25 इसकलििैं िपरमवर ौंगई िवक गयि ैं परमवर आदतरह रचकर सकूं. 26 वह ों और ़िों िरहिंअब उनकपविों पर रकट िगयै. 27 िपर परमवर अनयजिों इस भव धन रकट कर सहसमझा. वह ममें िबनमस, महिआशा.

28 हम िमतवक हर एक तथहर एक िउनीं रचकरतैं ि हम हर एक यकि मसें परिपकें रसकरें. 29 इसउदैं उनकमरअन, झमें रबल कर रहै, हनत करतपरिरम कर रहूं.

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