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Efésios 4

25 इसलिकर, हर एक यकि अपनपड़ोसच कहोंि हम एक शरैं. 26 "यदि िो, करो."4:26 स्तोत्र 4:4 तक , 27 अवसर ो. 28 वह, करतरहै, अब करिंपरिरम करि वह अपनों िगए उपयों अनों सहयतकर सके, िें िरकरत ै.

29 भदशबनहीं परऐसवचन िकले, अवसर अन, अनों िअनरह रण तथननों िभलो. 30 परमवर पविआतिकरो, िनकें टकििगई ै. 31 सब रककडहट, , , झगड़ा, िंा, आकतथरभवयअलग कर ो. 32 एक सररति तथसहदय बनरहो, तथएक सरउसरकषमकरो, िरकपरमवर मसें ें षमिै.

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