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फ़िलिप्पॉय 2:1-11

मसीह की विनम्रता का अनुकरण

1 इसलिये यदि मसीह में ज़रा सा भी प्रोत्साहन, प्रेम से उत्पन्‍न धीरज, आत्मा की सहभागिता तथा करुणा और कृपा है, 2 तो एक मन, एक सा प्रेम, एक ही चित्त तथा एक लक्ष्य के लिए ठान कर मेरा आनंद पूरा कर दो. 3 स्वार्थ और झूठी बड़ाई से कुछ भी न करो, परंतु विनम्रता के साथ तुममें से प्रत्येक अपनी बजाय दूसरे को श्रेष्ठ समझे. 4 तुममें से हर एक सिर्फ अपनी ही भलाई का नहीं परंतु दूसरों की भलाई का भी ध्यान रखे.

5 तुम्हारा स्वभाव वैसा ही हो, जैसा मसीह येशु का था:

6 जिन्होंने परमेश्वर के स्वरूप में होते हुए भी,

परमेश्वर से अपनी तुलना पर अपना अधिकार बनाए रखना सही न समझा;

7 परंतु अपने आपको शून्य कर,

दास का स्वरूप धारण करते हुए,

और मनुष्य की समानता में हो गया.

8 और मनुष्य के शरीर में प्रकट होकर,

अपने आपको दीन करके मृत्यु—

क्रूस की मृत्यु तक,

आज्ञाकारी रहकर स्वयं को शून्य बनाया.

9 इसलिये परमेश्वर ने उन्हें सबसे ऊंचे पद पर आसीन किया,

तथा उनके नाम को महिमा दी कि वह हर एक नाम से ऊंचा हो,

10 कि हर एक घुटना येशु नाम की वंदना में झुक जाए,

स्वर्ग में, पृथ्वी में और पृथ्वी के नीचे,

11 और हर एक जीभ पिता परमेश्वर के प्रताप के लिए स्वीकार करे,

कि मसीह येशु ही प्रभु हैं.

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