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गलातिया 5:16,17,22,23

OHSS Hindi Contemporary Version

16 मेरी सलाह यह है, तुम्हारा स्वभाव आत्मा से प्रेरित हो, तब तुम किसी भी प्रकार से शारीरिक लालसाओं की पूर्ति नहीं करोगे. 17 शरीर आत्मा के विरुद्ध और आत्मा शरीर के विरुद्ध लालसा करता है. ये आपस में विरोधी हैं कि तुम वह न कर सको, जो तुम करना चाहते हो.

22 परंतु आत्मा का फल है प्रेम, आनंद, शांति, धीरज, दया, उदारता, विश्वस्तता, 23 विनम्रता तथा आत्मसंयम; कोई भी विधान इनके विरुद्ध नहीं है.

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    16 परंतु मैं कहता हूँ, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की अभिलाषाओं को किसी भी रीति से पूरा नहीं करोगे। 17 क्योंकि शरीर आत्मा के विरुद्ध लालसा करता है और आत्मा शरीर के विरुद्ध। ये एक दूसरे के विरोधी हैं ताकि तुम उन कार्यों को न कर सको जो तुम करना चाहते हो।

    22 परंतु आत्मा का फल प्रेम, आनंद, शांति, धैर्य, कृपा, भलाई, विश्‍वासयोग्यता, 23 नम्रता और संयम है। ऐसी बातों के विरुद्ध कोई व्यवस्था नहीं है।

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    16 पर मैं कहता हूँ, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। 17 क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में5:17 शरीर आत्मा के विरोध में: शरीर की अभिलाषा और हठ आत्मा के विरोध में होती हैं। और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करता है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिए कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ। 22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, और दया, भलाई, विश्वास, 23 नम्रता, और संयम हैं; ऐसे-ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।

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