हबक्कूक की शिकायत
2 हे याहवेह, कब तक, मैं सहायता के लिए गुहार लगाता रहूंगा,
पर आप नहीं सुनते हैं?
या कब तक मैं आपसे पुकारकर कहूं, "हिंसा!"
पर आप बचाते नहीं हैं?
3 आप क्यों मुझे अन्याय को देखने के लिये विवश कर रहे हैं?
आप क्यों गलत कामों को सहन कर रहे हैं?
विनाश और हिंसा मेरे सामने आ गयी है;
लड़ाई और झगड़े बहुत हो रहे हैं.