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João 5

थज़ाजलशय पर अपयद

1 इन ों पशमसयहिों एक परें शलगए. 2 शलें ़-टक एक जलशय ै, इबें थज़ाकहलऔर िसकांओसैं, 3 उसकिे, अपऔर लकवअनपड़े रहते, 4 [जल िलनरतिकरतोंि उनकयति परमवर वरगदसमय समय पर वहां आकर जल िकरता. जल िलती, यकि उसमें सबसपहलउतरता, वसा]. 5 इनमें एक यकि ऐसा, अडवरा. 6 मसउसवहां पड़े और यह पर ि वह वहां बहसमय पड़ा ै, उसककर ा, "वसहतो?"

7 उततर िा, "मन, ऐसनहीं, जल िलनपर जलशय ें उते—रयअनयकि उसमें उतर ै."

8 मसउससकहा, "उठो, अपनिउठऔर चलनिरनलगो." 9 वह यकि वसगयऔर अपनिउठकर चलगया.

वह शबा. 10 अतयहअगवसयकि कहा, "आज शबै. अतिउठउचिनहीं ै."

11 उसनकहा, "िोंवसिै, उनीं आजी, अपनिउठऔर चलनिरनलगो.’ "

12 उनोंउससा, "वह, िसनमसकहि अपनिउठऔर चलनिरनलगो?"

13 वसयकि नहीं नति उसकवसकरनोंि उस समय मसें गए े.

14 समय मसउस यकि िें उससकहा, "ो, वसगए ो, अब करना. ऐसि इसस." 15 तब उस यकि आकर यहअगििि िोंउसवसिै, वह ैं.

मसपरमवर-प

16 शबपर मसयह िरण यहअगउनकसतलगे. 17 मसपषिा, "िअब तक कर रहैं इसलिैं कर रहूं." 18 परिमसवरयहअगमसहतिऔर अधिठन गए ोंि उनकअनमसशबिि नहीं रहबलि परमवर अपनिकहकर वयपरमवर दररहे.

19 मसकहा: "ैं पर एक अटल सचरकट कर रहूं; वयनहीं कर सकता. वह वहकर सकतै, वह िकरतखतोंि िकरतैं, वहकरतै. 20 िकरतैं और वह अपनहर एक जनपरििरखतैं. वह इनसबड़े-बड़े िे, िें चकिओगे. 21 िरकिमरिकरकवन रदकरतैं, उसरकिहतै, वन रदकरतै. 22 ििनहीं करते, करनअधिउनोंौंिै. 23 िसससब आदर करें िकरतैं. वह यकि, आदर नहीं करता, िआदर नहीं करता, िोंै.

24 "ैं पर यह अटल सचरकट कर रहूं: वचन नतऔर जनें िकरतै, अनवन उसै; उसनहीं ठहरा, परवह कर वन ें रवकर ै. 25 ैं पर यह अटल सचरकट कर रहूं: वह समय रहपरगयै, जब तक परमवर आवेंऔर हर एक ननवन ्‍करा. 26 िरकिअपनआप ें वन रखतै, उसरकें बसवन ििगयवन ै. 27 मनरण उसकरनअधििगयै.

28 "यह सब नकर चकिोंि वह समय रहै, जब सभमरआवेंऔर िे. 29 करवन नरिऔर करनरि. 30 ैं वयअपनओर नहीं कर सकता. ैं उनसि्‍करतूं, िणय ूं. िणय सचोंि ैं अपनइचनहीं परअपनजनइचकरनिसमरिूं.

मसगव

31 "यदि ैं वयअपनिषय ें गवूं गवनहीं ी. 32 एक और ैं, गवैं और ैं नतूं ि िषय ें उनकगवअटल ै.

33 "मनहन अपनऔर हन सच गवी. 34 परअपनिषय ें िमनगवरत नहीं—यह सब ैं उदिकह रहूं. 35 हन वह जलतऔर चमकतपक े, िनकउजें ें समय तक आनमनखद लगा.

36 "गवहन गवअधिबड़ी ोंि िौंगए करनइस सचसबि िै. 37 इसकअतिििअरवयजनिषय ें गवै. मनकभउनकआवै, उनक38 और उनकवचन दय ें िरह सकोंि िउनोंै, उसमें िनहीं करते. 39 ों मनन इस िें करति उनमें अनवन बसै. सभिषय ें गवैं. 40 यह सब पर वन िआननहीं हते.

41 "मनरशनहीं 42 ोंि ैं ें नतूं और यह ि परमवर मन ें नहीं. 43 रहण नहीं करतजबकि ैं अपनिें आयूं िंयदि अपनें आए उसरहण कर े. 44 झमें िकर सकतयदि एक सररशआशकरतऔर उस रशिरयनहीं करते, एकमपरमवर ्‍ै?

45 "यह िअपनमन िि िमनैं पर आरलगा; पर पण करेंे—, िपर मनआशलगरखै. 46 यदि तव ें ें िकरतझमें करतोंि उनोंिषय ें िै. 47 जब उनकों िनहीं करतों िकरे?"

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