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Lucas 11

रभिगयथनउदहरण

1 एक िरभएक पर थनकर रहे. जब उनोंथनसम्‍उनकिों ें एक उनसिनती, "रभु, हमकथनकरनििहन अपनिों िै."

2 रभउनसकहा, "जब थनकरो, इस रकिकरो:

" हमवरिा!

आपकसभजगह समिो.

आपकहर जगह िो.

3 हमजन हमें हर ििि.

4 हमों षमि.

हम उनकषमकरतैं, हमिकरतैं.

हमें परें सनबचइए.’ "

5 रभउनसआगकहा, "ममें िएक िआधें आकर यह िनतकरे, ि! िां ो; 6 ोंि एक िकरतघर आयऔर उसकजन िनहीं ै.’ 7 तब वह दर उततर े, मत सत! और लक रहैं. अब ैं उठकर ें नहीं सकता.’ 8 ैं कह रहूं उससमझो: ांि वह यकि िपर भलउसे, िउस िबहिनतकरनपर उसकरत अनउसअवशा.

9 "यहरण ि ैंमसकहै: िनतकरो, ें िएगा; ो, ओगे; खटखट, वह ििएग10 ोंि हर एक, िनतकरतै, उसकिनतै, जतै, वह ्‍करतऔर वह, खटखटै, उसकििै.

11 "ममें िऐसै, अपनमछलांगनपर उसां12 िनतपर िू? 13 जब पर अपनउततम वसरदकरननतवरिउनें, उनसिनतकरतैं, कहीं अधिबढकर पविआतरदकरेंे, उततम ै?"

रभपर आर

14 रभएक यकि ें े, ूंा, एक िरहे. िकलतवह, ूंा, लनलगा. यह अचिरह गई. 15 िंउनमें कहा, "वह रधलजसहयतिलतै." 16 अनरभपरखनउदउनसअदिांी.

17 उनकमन ें नकर रभउनसकहा, ", िसमें पडै, और िपरिें पडो, उसकै. 18 यदि अपनिकरनलगउसकिरह सकतै? ैं सब इसलिकह रहूं ि यह कर रहि ैं लजसहयतिकरतूं. 19 यदि ैं लजसहयहर िकरतूं िअनउनकहर करतै? परिमसवरपर आरलगे. 20 िंयदि ैं परमवर मरिलतूं, तब परमवर मधै.

21 "जब बलवयकि शसों तरह सजिकर अपनघर कसकरतै, उसकपति रकिरहत22 िंजब उससअधिबलवयकि उस पर आकरमण कर उसअपनवश ें कर और सभशस, िपर वह भरकरता, ै, वह उसकपति टकर ांै.

23 "वह, पकें नहीं िऔर वह, इकटनहीं करता, वह िरतै.

24 "जब ियकि ें हर ै, वह िें ों ें िरतै, िंउसि्‍नहीं ा. तब वह चति ैं ििकर आयी, वहीं ं. 25 वह वहां टकर उसी, और थरै. 26 तब वह कर अपनअधिआतऔर आतऔर सब उस यकि ें रवकर उसमें अपनघर बनैं. तब उस यकि िि पहलखरै."

27 जब रभयह िरहे, ें एक उठी, "धनवह ा, िसनआपकजनिऔर आपकलन षण िा."

28 िंरभकहा, "परधनैं, परमवर वचन नकर उसकलन करतैं."

अविरति वन

29 जब और अधिइकटलगे, रभकहा, "यह ़ी अत़ी ै. यह चमतिों ांकरतिंभवियवकिअतििइसऔर िनहीं िएगा. 30 िरकपरमवर ओर भवियवकनवनगरविों िएक िे, उसरकमनइस ़ी िएक िै. 31 य-दिवस पर दकिइस ़ी खड़ी और इसिोंि वह कर शलननआई ी; िंयहां वह ै, शलबढकर ै. 32 य-दिवस पर नवनगर जनतइस ़ी उपसिऔर इसिोंि उसनभवियवकरचपरिमसवरपशकर िा, िंयहां वह ै, भवियवकबढकर ै.

तरि िषय ें ि

33 "जलकर उसऐसपर रखतै, जहां वह और िबरतन े; परवह उसउसकियत पर रखतै, ि रवकरतैं, सकें. 34 शरपक ैं. यदि िैं, शरउजििंयदि ें ैं, शरिा. 35 रहि तर िउजधको. 36 इसलियदि शरउजिै, उसमें धकनहीं ै, तब वह सब जगह उजा—एक अपनउजें उजिै."

यहअगउलहन

37 जब रभअपनरवचन सम्‍कर े, एक उनें जन िआमििा. रभउसकगए तथजन िगए. 38 उस यह आशचरि जन रभनहीं .

39 रभइस पर उससकहा, "और हर करतिंदय और टतभरैं. 40 ििों! िसनहरबनै, उसदरनहीं बना? 41 ममें दर बसै, उसें ो, तब और े.

42 "िपर, िो! परमवर अपना, तथअनहर एक ग-पदसवां िंमनों रति और परमवर रति उपकरतो. ़ें ैं, िनककरनआवशयक ै—अनों उपििा.

43 "िपर, िो! ें सभों ें रधआसन तथनगर ें ों समभरनमसपसै.

44 "िपर! ोंि उन िकबों समिपर अनजचलतिरतैं."

45 एक वकरभकहा, "वर! ऐसकहकर आप हमअपमकर रहैं."

46 रभइसकउततर ें कहा, "िपर ी, वकों! ोंि ों पर ियमों ऐसो, िसकउठकठिै, जबकि वयउनकसहयतिअपनगलतक नहीं.

47 "िपर! ोंि भवियदवकिरक बनो, जबकि अपनवजों उन भवियदवकहती. 48 इस रकअपनवजों करों गवऔर इसकतरह समरथन करतो—ोंि े, िोंभवियदवकहतऔर अब उनीं रक बनो. 49 इसलिपरमवर ि यह कहनै: ैं उनकभवियवकऔर िूंा. उनमें हतकर ेंतथउत़िकरें50 ि ि पनकर आज तक भवियदवकलहबहनिइस़ी ि; 51 िकर करयतक, िनकहततथिमधगई ी. ां, िकरो: इसकिइस़ी िएगा.’

52 "िपर, वकों! मनुंैं, िंमनइसमें रवनहीं िा, और इसमें रवकर रहे, उनककर िै."

53 रभवहां िकलनपर और ी, उनककटटर िगए े, उनसअनिषयों पर कठिरशकरनलगे. 54 इस ें ि रभउनकिकथन ें.

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