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Lucas 12

रभपषतथिडर रवचन

1 इससमय वहां हज़ाों ों इतनिसमइकटगयि एक सरपर िरहे. रभसबसपहलअपनिों िकरतकहा, "िों खमअरोंवधरहो. 2 ऐसढकनहीं, िएगऐसरहसनहीं, िरकट िएगा. 3 शब, मनधकें कहैं, रकें े, मनतरकमरें ों ें कहै, वह छत रचिएगा.

4 "िों, ो: उनसभयभो, शरकर सकतैं िंइसकइससअधिऔर नहीं 5 पर ैं ें समझूं ि िससडरनसहै: उनीं े, िें शरकरननरें ोंकनअधिै. सच ो, उनीं डरनउचिै. 6 असिओन ें ांां नहीं ीं? िपरमवर उनमें एक नहीं लते. 7 िएक-एक िै. इसलिभयभो. अनकहीं अधिै.

8 "ैं मसकहतूं ि मनों मनकरतै, मनउसपरमवर वरगदों मनकरा, 9 िंमनों मनअसकरतै, उसकपरमवर वरगदों मनइनकिएगा. 10 यदि मनिएक शबकहतै, उसषमकर िएगिंपविआतिंिलकषमएगी.

11 "जब उनकसभों, सकों और अधििों मनरसिइस िषय ें िंकरनि अपनबचें ें उततर कहन12 ोंि पविआतपर रकट करेंि उस समय कहनसहा."

पति इकटकरनपर ि

13 उपसिें िरभकहा, "वर, कहिि वह िपति टवकर े."

14 रभइसकउततर ें कहा, "नव! िसनियकरमधयसठहरै?" 15 तब रभखतउनें वनी, "वयहर एक रकलच बचरखो. मनवन उसकपति बहयत पर भलनहीं ै."

16 तब रभउनकमनयह ांरसिा: "ियकि ि अचफसल उतपन्‍. 17 उसनमन ें ििा, अब ैं करूं? फसल रखनिनहीं ै.’

18 "िउसनििा, ैं ऐसकरतूं: ैं इन बखों कर बड़े ििकरूंा. तब उपज तथवसरख रखसका. 19 तब ैं वयकहूंा, "अनवरों िअब िउततम वसइकटैं. िकर! ा, और आनकर!" 

20 "िंपरमवर उससकहा, अर! आज झसिे; तब सब, अपनिइकटकर रखै, िसका?’

21 "यहउस यकि िि, अपनिइस रकइकटकरतिंपरमवर ि ें धनवनहीं ै."

िंिवन

22 इसकअपनिों उनरभकहा, "यहरण ि ैंमसकहै, अपनवन िषय ें यह िंकरि हम अपनशरिषय ें ि हम पहनेंे. 23 वन जन तथशरवसों बढकर ै. 24 ों पर िकरो: ैं और टतैं. उनकखलिैं और ; िपरमवर उनें जन रदकरतैं. पकिों कहीं अधिबढकर ै! 25 ममें ै, िंअपनआयें एक पल बढ़ा ै? 26 जब यह नहीं कर सकतभलअनिषयों ििंिों रहतो?

27 "गलों ो! कतकरतैं और ; परैं कहतूं ि शलतक अपनऐशवरें इनमें एक सजे. 28 यदि परमवर ृंइस तक करतैं, िसकवन ़े समय और कल आग ें ोंिएगा, वह ें और ितनअधििकरेंे? कमजि! 29 इस उध़-ें लगरहि ओगिऔर इसकिंकरो. 30 िसभइसें लगैं. िपहलयह ि ें इन वसरत ै. 31 इनकजगह परमवर करऔर सभवसी.

32 ", ें कम ो, भयभोंि िें कर ैं. 33 अपनपति चकर ्‍धनरि िधनों ें ांो. अपनिऐसधन इकटकरो, नषनहीं िसकतै—वरें इकटिधन; जहां िपहुंऔर िकरऩों ी. 34 ोंि जहां धन ै, वहीं मन ा."

रभआगमन अनपितत

35 "हमरहतथअपनजलरखो, 36 उन वकों सम, अपनरतें ैं ि वह जब िसव टकर आए और खटखटउसकिें. 37 धनैं , िें टनपर गतएगा. सच यह ि वक वसरण कर उनें जन िएगतथवयउनें जन परा. 38 धनैं , िें सरसररहर ें आकर गत. 39 िंयह ो: यदि घर यह ि िसमय आएगवह उसअपनघर ें सने. 40 इसरकवधरहनोंि मनआगमन ऐससमय पर िसककलपनतक नहीं कर सकते."

41 तरउनसरशिा, "रभु, आपकयह ांहमििी?"

42 रभउततर िा, "वह िसयऔर ििसभवकों रधठहरि वह अनवकों ििसमय पर मगे. 43 धनवह वक, िघर टनपर यहकरत. 44 सचयह ि घर उस वक ों ें अपनपति ़िौंा. 45 िंयदि वह अपनमन ें कहनलगे, अभटनें बहसमय ै’ और वह अनस-दिों िकरनलगऔर ा-कर नशें . 46 उसकएक ऐसिा, िसकउसनकलपनऔर एक ऐसषण ें, िसकिषय ें उसउसककड़े-कड़े कर उसकिनतअवििों ें कर ा.

47 "वह , िअपनइचपतिंवह इसकिऔर उसनउसकइचअनयवहिा, कठएगा. 48 िंवह, िइसकपतऔर उसनअपरि, कम एगा. हर एक े, िबहिगयउससबहें िएगतथिअधिें ौंगयै, उससअधिििएगा.

ांि नहीं बलि िजन

49 "ैं पर आग बरसलकआयूं और उततम यदि यह इससमय ा! 50 िंिबपतिरकिििऔर जब तक यह रकिनहीं ी, ुःखदइसक़ा! 51 िा—ैं पर ल-मििआयूं? नहीं! ल-मिनहीं, परि. 52 अब ांसदसों परिें पडएगिऔर ि. 53 सब एक सरिोंे—िऔर िे; और े; र-वधऔर र-वधे."

िकट आतकट भवियव

54 िकरतरभकहा, "जब पशििें दल उठतखतकहतो, िी’ और िै. 55 जब पवन दकििबहतकहतो, अब गरपड़ेी,’ और ऐसकरतै. 56 िों! धरतऔर आकओर खकर कर िंइस ों नहीं कर सकते?

57 "वयअपनिसहगलत सलों नहीं कर े? 58 जब अपनशतमनरसरहो, रयकरि ें ों ें अनयथवह ें घसटकर मनरसकर ा, ें अधिौंऔर अधिें ें ा. 59 ैं मसकहतूं ि जब तक एक-एक ओगे."

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