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Marcos 12

िों ां

1 मसउनें ों यम ििा: "एक यकि बगें लग, उसकों ओर लग, उसमें रसकुंा, रककरनमचबनऔर उसिों पटपर कर पर चलगया. 2 उपज अवसर पर उसनअपनएक उन िों ि वह उनसउपज आए. 3 िों उस पकड़ा, उसकितथउसिा. 4 उस यकि िएक अना. िों उसकिपर रहकर उसयल कर ितथउसकशरमनयवहिा. 5 उस यकि िएक और उनका, िसकउनोंहतकर ी. उसनअनबहों े, उनोंा-तथिों हतकर ी.

6 "अब उसकजनिएक यकि ा—उसकि. ततउसनउसउनकिा. उसकिा, समकरेंे.’

7 "उन िों आपस ें ििा, ो, यह िै. यदि इसकहतकर ें यह पति हमएगी!’ 8 उनोंउसकहतकर और उसहर िलकर ेंिा.

9 "अब बगमनिकलरह गयै? वह आकर उन िों करऔर उदपटअनिों ा. 10 मनपवियह नहीं पढ़ा:

" िपतथर जमििों िकमिकर िा,

वहपतथर बन गया;

11 यह रभओर ,

और यह हमि ें अदै’12:11 स्तोत्र 118:22, 23?"

12 फलसवररधितथरभपकडजनें गए, ोंि यह समझ गए ि रभउन पर यह ांकहै. िंउनें भय ा. इसलिइस अवसर पर मसवहां चलगए.

कर रश

13 यहिों मसिों तथसमरथकों ि मसउनकिें सके. 14 उनोंआकर मसयह रशिा, "वर, यह हमें ि आप एक सचयकि ैं. आपकिसमरथन रत नहीं ोंि आप ें पकषपनहीं. आप सचें परमवर िैं. हमें यह बतइए: कयसर12:14 कयसर अर्थात् रोमी सम्राट कर यवसअननहीं? 15 हम कर ें नहीं?"

उनकांकर मसउनसकहा, "ों ि कर रहो? कर ि." 16 मसएक आए. मसवह उनें िउनसरशिा, "यह तथिसकै?"

"कयसर ा," उनोंउततर िा.

17 मसउनसकहा, "कयसर ै, वह कयसर और परमवर ा, वह परमवर ो."

यह रह गए.

मरउठनरश

18 िसद, नरें िनहीं करते, रभआए. उनोंउनसरशिा, 19 "वर, हमििैं यदि ििःपतरहतिधन उसकउस िकर अपनिकरे. 20 इसदरें एक घटनइस रकै: े. पहलििऔर िचल बसा. 21 सरउसकपतिकर िा, वह िचल बसा. सरयहिि रही. 22 इस रकों इयों िगई. इसकउस गई. 23 अब यह बतइए ि नरपर वह िसकपतकहलएगी? ोंि उसकिों इयों ा."

24 मसउनें उततर िा, "इस रण यह ि मनपविों समझऔर परमवर मरो. 25 नरें ििैं और वहां िकरैं—वहां वरगदों समोंे. 26 जहां तक मरउठनरशै, मनें नहीं पढ़ा, जहां जलत़ी वरणन ै? परमवर कहा, ैं अबपरमवर, िसहपरमवर तथपरमवर ूं’?12:26 निर्ग 3:6 27 आप बड़ी ें पड़े ैं! वह मरनहीं परिों परमवर ैं."

सबसबड़ी आज

28 उससमय एक वहां रहा. उसनउनकिा. यह ि मसउनें सटउततर िै, उसनमसा, "सबसबड़ी आजै?"

29 मसउततर िा, "सबसबड़ी आजै: ो, इसएलिो! रभहमपरमवर अदिरभैं. 30 रभपरमवर अपनदय, , समझ तथशकि करो.’ 31 सरआजै, अपनपड़ोअपनसमकरो.’ इनसबढकर और आजनहीं."

32 उस मसकहा, "अति ुंदर, वर! आपककहनहमसतै. वहएकमैं—उनकअतििऔर नहीं 33 तथउनसदय, समझ तथशकि करना, तथअपनपड़ोअपनसमकरनसभमबलिों तथबलिों बढकर ै."

34 जब मसयह ि उसनिउततर िै, उनोंउससकहा, "परमवर नहीं ो."

इसकिें उनसऔर रशकरनहस रहा.

मसिसक?

35 िगन, ें िमसउनकमनयह रशरखा, "यह ों कहतैं ि मसशज ैं? 36 े, पविआता, ें आतमलकहा:

" रभपरमवर रभकहा:

"ीं ओर रह

जब तक ैं शत

अधकर ूं." 12:36 स्तोत्र 110:1

37 वयउनें रभकहकर िकर रहैं इसलििें रभ?"

उनकइस द-विआनरही.

िों और िों

38 आगिमसकहा, "उन िों वधरहना, लहरवसपहनकरतैं, वजनिथलों पर समनपनमसआशकरतै. 39 यहसभों ें आसन और वतों ें पसकरतै. 40 िधवघर हडैं तथिउदलमी-लमथनकरतैं. कठइनक!"

िधव

41 मसिमने. वह रहि िें िरकरहैं. अनधनबड़ी-बड़ी ि रहे. 42 एक िधन िधववहां आई, और उसनांि्‍ैं.

43 मसअपनिों आकरिकरतकहा, "सच यह ि इस िधन िधवें उन सभबढकर िै. 44 ोंि सभअपनधन बढें िै, िंइस िधवअपनिधनतें अपनपति ी—यह उसकिी."

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