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मार्कास 5

़ियकि

1 तब सरतट पर िें आए. 2 मसउतरतएक मनिसमें अशआतकबिकलकर उनकआया. 3 वह कबों मधरहकरता. अब उसांकलों तथ़िों ांें समरा. 4 बहउस़िों तथांकलों ें ांरयिगए िंवह ांकलों तथ़िों कड़े-कड़े कर लता. अब िें इतनषमति उसवश ें कर सके. 5 त-दिकबों मधतथपह़िों ें वह िरहततथवयपतथर र-मकर यल कर ा.

6 जब उसनमसा, वह कर उनकआया, अपनि7 और उसमें आवें शबि, "परम रधपरमवर ु! आपकनदनहीं. आपकपरमवर शपथ, कषें," 8 ोंि मसउसआजे, "ा, इस मनें िकल !"

9 तब मसउससरशिा, "ा?"

उततर िा, "5:9 मूल में लेगिओनोंि हम बहैं." 10 मसिनतकरनलगि वह उसउस रदहर ें.

11 वहीं पह़ी पर अरों एक िुंचर रहा. 12 ा-सममसिनती, "हमें इन अरों ें िि हम उनमें बसें." 13 मसउनें यह आजी. हर िकलकर उन अरों ें रवकर गए. लगभग हज़ाअरों वह ुंपहढलपर गति ें ा.

14 भयभरखवगए तथनगर और ों ें कर इस घटनिषय ें बतलगे. नगरवी, ा, उसखनवहां आनलगे. 15 जब मसपहुंे, उनोंि वह ़ियकि वसरण िसचिि ें वहां ा. यह वहयकि िसमें ी. यह डर गए. 16 घटनरम खनों उनकमनइसकबयिि ़ियकि तथअरों ा-ै. 17 इस पर मसिनतकरनलगि वह उनकहर चलं.

18 जब मसपर सवरहे, ियकि मसिनतकरनलगि उसउनकि. 19 मसउसइसकअनमति नहीं परउसआदिा, "अपनपरिजनों और उनें बति िरभे-आशचरयकरिैं तथपर उनकि ै." 20 वह िनगर ें गयऔर उन ों वरणन करनलगा, मसउसकििे. यह सभचकिरह गए.

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