10 किंतु तुम साथी पर आरोप क्यों लगाते हो? या तुम उसे तुच्छ क्यों समझते हो? हम सभी को परमेश्वर के न्याय आसन के सामने उपस्थित होना है. 11 पवित्र शास्त्र का लेख है:
"यह प्रभु का कहना है, ‘शपथ मेरे जीवन की,
हर एक घुटना मेरे सामने झुक जाएगा,
हर एक जीभ परमेश्वर को स्वीकार करेगी.’ "14:11 यशा 45:23
12 हममें से प्रत्येक परमेश्वर को स्वयं अपना हिसाब देगा.